कहानी

पता क्या है उसे, जाने दस्तक किसकी?
घड़ी की, दरवाज़े पे, गुलदस्ते की लकीर जिसकी।
नये साल की मिसाल क्या-क्या नहीं कहेगी,
कहानी थी, कहानी है, और कहानी ही रहेगी।

संकल्प हैं कुछ नये, रिश्ता भी है नया,
चल रही बयार है, मिला है नया वाकया।
किस्सों की रेलगाड़ी हर तरफ चलेगी,
कहानी थी, कहानी है, और कहानी ही रहेगी।

निकल जाते हैं सालों-साल, बनकर हम हवा,
लेकिन पसंद वही है घर की, लड्डू, बेसन, रवा,
डिब्बा तभी खाली होगा जब मंज़िल पुकारा करेगी,
कहानी थी, कहानी है, और कहानी ही रहेगी।

सफ़र ही कह लो इसे, या कोई चमत्कार,
सिफ़र से ही शुरू हैं सारे आविष्कार,
मंज़िल न होते हुए भी नदी बेधड़क बहेगी,
कहानी थी, कहानी है, और कहानी ही रहेगी।

कहती है किस्मत दिल से, आज लिखेंगे कल,
बढ़ायेंगे हर हारी हुई ज़िंदगी का मनोबल,
स्त्री थाली खाएगी और हैवानियत घास चरेगी,
कहानी थी, कहानी है, और कहानी ही रहेगी।

“पर होगा कैसे ये?” किसी ने पूछा मुझसे,
मैंने कहा, “भरोसा ही तो रखना है, वजूद है तुझसे”।
जज़्बात के रंग ज़िंदगी खुद हाथों में मलेगी,
कहानी थी, कहानी है, और कहानी ही रहेगी।

सोच भी नयी है, नया है संगीत,
खुशियाँ होंगी चारों ओर, बदल जाएगी रीत।
कोशिशें भी कहती हैं, वो आलस न सहेगी,
कहानी थी, कहानी है, और कहानी ही रहेगी।

तो आओ आज प्रण लें, बदल देंगे दास्तान,
छू लेंगे ऊँचाईयाँ, हाथ मिलाएगा आसमान।
ज़िंदगी गुलज़ार होगी तो खुद ही कहेगी,
कहानी थी, कहानी है, और कहानी ही रहेगी।

Poem By: Aditya Seetha

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