हर सेवक को सलाम

 

सेवा से बढ़कर कुछ नहीं,
सालों पुरानी सीख है,
शुक्रिया न करें हम तुमको,
कोई न ऐसी तारीख़ है।

ज्ञान के इस सागर में,
ये नाव तुमसे है बनी,
सैर जिसमें हम सब करें,
तकलीफ जिससे हो नहीं।

सेनापति सा रूप है,
चौकन्ना रहते हर पल,
चैन की नींद हो इसका,
एक कारण है यह सेना दल।

उस नाव की ऊर्जा है जिससे, स्त्रोत उसके तुम ही हो,
अन्नदाता सा कार्य है, ज्योत जिसके तुम ही हो,
सुबह शुरू जो शाम तक,
वो काम भी अनेक हैं,
मुस्कराहट चेहरे पे लेकिन,
इरादे सबके नेक हैं,

इमारत ऊँची है बड़ी,
हज़ारों इसके रूप हैं।
यह ढाल सी जो है खड़ी,
जुनून इसमें खूब हैं,
दमदार मुट्ठी है अगर,
उँगलियाँ ही उसकी जान हैं,
एकता हो रूह में जिसकी,
आप ही वो शान हैं।

 

Poem By: Pratyush Dubey

Special Thanks: Aditya Seetha

1 thought on “हर सेवक को सलाम

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